Saturday, 22 October 2011

क्रांति और मौत


हुक्म राजघराने से निकलता है
त्रस्त जनता होती है
जनता क्रांति करती है,
राजघरानों का अंत करती हैं -
..... क्रांतियां
राजा की हत्या होती है,
मारे जाते हैं,
क्रांतिकारियों द्वारा...
फिर यही क्रांतियां
तानाशाह को जन्म देती हैं.
और क्रांतिकारी भी
तानाशाह बन जाते हैं
आखिर वो भी
मारे जाते हैं,
कई बार मारे जाने वाले
तानाशाह नहीं भी होते...
सिपाही मात्र होते हैं,
पर मारे जाते हैं,
क्रांति के सिपाहियों द्वारा...
पर तानाशाह कभी मरते नहीं
सदा मारे जाते हैं..
जनता मरती है....
कुत्ते की मौत कहते हैं जिसे,
तानाशाह को वो मौत भी नहीं मिलती
क्योंकि वो तो रिज़र्व रहती है
रोड पर सोनेवाले के लिए
सुखपूर्वक मरने के लिए.

15 comments:

  1. गहरी बात। तानाशाह मरते हैं परंतु वह प्रवृत्ति नहीं मरती। सत्ता के शिखर पर बैठे लोगों में दिख जाती है बाकियों में शायद छिप जाती है।
    सुन्दर कविता!

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  2. तानाशाही भी शायद बस अपना चोला ही बदल लेती है, वर्ना ये क्रान्तिकारियां भी अपनी ही मौत यूँ न मरतीं !

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  3. एक संवेदनशील विषय पर सहजता से लिखी गई कविता... लीबिया में गद्दाफी के अंत को देखते हुए कविता की सार्थकता बढ़ जाती है... बहुत बढ़िया...

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  4. संवेदनशील और वैचारिक ! तानाशाही तो एक प्रवृत्ति है भाई!

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  5. दोहों के आगे दोहे
    =========
    ज्योति-पर्व पर आपको, प्रेषित मंगल-भाव।
    भव-सागर में आपकी, रहे चकाचक नाव॥
    =========
    सद्भावी- डॉ० डंडा लखनवी

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  6. मरण तो सभी का एक-सा ही होता है. हम हालात के अनुसार उस पर ठप्पा लगा देते हैं कि वह कुत्ते की मौत मरा या किसी और जैसी. दुनिया में हाल की घटना पर बढ़िया रचना.

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  7. दीपावली पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  8. सार्थक रचना, सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें.



    "शुभ दीपावली"
    ==========
    मंगलमय हो शुभ 'ज्योति पर्व ; जीवन पथ हो बाधा विहीन.
    परिजन, प्रियजन का मिले स्नेह, घर आयें नित खुशियाँ नवीन.
    -एस . एन. शुक्ल

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  9. संवेदनशील रचना
    आपको और आपके प्रियजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें….!

    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  10. दीपक बाबा भाई बहुत ही मौजू रचना प्रस्तुत की है सर्वकालिक .दिवाली मुबारक .

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  11. दीपक जी! आपको, आपके मित्रों और परिजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  12. प्रस्तुति अच्छी लगी । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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  13. तानाशाही नहीं चलेगी। लोकतंत्र की जय।

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  14. क्योंकि वो तो रिज़र्व रहती है...

    हा....हा...हा.....
    बिलकुल सही उस पर तो पहला हक़ रोड पर सोने वालों का ही है ....

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