Saturday, 20 August 2011

बारिश और क्रांति

यूँ ही एक रिमझिम दुपहरी में ...
बलजीत नगर के चोहराए पर
फोटू क्लिक किया की ....
क्वोनो क्रांति के काम आएगी ..

जय राम जी की.
बारिशों जैसे -
क्रांतियों की भी रुत होती है.. 
और आजकल दोनों ही एक साथ हैं.....
दुपहिया वाला और रक्सेवाला सवारी सहित ..
बारिश से बचता है..... और क्रांति से भी 
पनाह मांगता है...... 
बारिश और क्रांति दुनो से ...
टाइम खोटी .... पैसा खोटी....

मारुती वेन वाला बेफिक्र...
साधनसम्पन..
न बारिश की चिंता...
न क्रांति की... 
"टाइम मिला तो मोमबत्ती जलाएंगे" 
फिलहाल माल सही जगह पहुचना है.

और उ जो जूस की दूकान पर खड़े है.... 
उ बारिश में नहीं भीगना चाहते ...
पर क्रांति की बातें करते हैं ... 

कोफ़्त होती है ... जूसवाले को.
सुसरा जूस का दुकाने नहीं हुए 

18 comments:

  1. @फिलहाल माल सही जगह पहुचना है

    फ़िलहाल जीवित रह पाये तो बेहतरी की बाद में सोचेंगे।

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  2. वाह सुन्दर अन्दाज़ है बात कहने का।

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  3. आपने सही कहा पर होना तो वही है जो सदियों से होता आया है क्यों की ये भारत की जनता है जिसे कुछ दिखाई नहीं देता बस उसे दिखाना पड़ता है जनता तो वही है जो अन्ना के अनसन से पहले थी क्या ये जनता पहले मर गई थी क्या क्या हुआ था इस जनता को १२५ करोड़ जनता में १ अन्ना ही क्यों निकला १ गाँधी जी क्यों निकले बात वही है की अब कलयुग आज्ञा है अभी तो कुछ हुआ भी नहीं है होना तो बाकि है और होना भी क्या है इस देश में आँखों के अंधे रहते है उस देश की दशा असी होती है फूट डालो राज करो इस समय bhrstachar जसे खाने की कोई वस्तु का नाम है जो खरब हो चुकी है अब उसे फेंकना है अरे मेरे देश वाशियो जागो अब भी कुछ हुआ नहीं है पर इस जनता को कुछ कहना भी बेकार लगता है क्यों की सब अपना पेट पलते नजर आते है किसी को नहीं लगता की ये मेरा भारत है मेरा भारत महँ जेसा नारा लगाने से कुछ नहीं होगा कुछ महान कर्म करो अन्ना के पीछे तो तुम लोग हो पर क्या इस लोक पल बिल से सब कुछ सही हो जायेगा ये नेता लोग सब कुछ छोड़ देगे अरे मेरे भाइयो आज अगर किसी ने किसी को मर दिया है तो उस को जेल होते होते २० साल गुजर जाते है फिर जज बदल जाते है मुंबई बम धामके के आरोपी १ अज भी जेल में है पैर उसको फंसी देने की जगह पोलिस उसकी हिफाजत में लगी है उसकी मेहमान नवाजी कर रही है हर रोज़ उसका मेडिकल होता है लाखो रूपया खर्चा होता है जेसे पोलिश का या सरकार का वो जवाई है कुछ नहीं होने वाला इस देश का और नेताओ का जय जवान जय किशन
    अगर आप मेरी बैटन से सहमत नहीं है तो करपिया मेरे ब्लॉग लिंक पे क्लिक करे और अपनी राय देवे
    दिनेश पारीक
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

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  4. अपनी बात रखने का अलग अंदाज़ है आपका ...बाबा जी ........बहुत खूब

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  5. बाबा से खफा होने वाले --
    बाबा की बकबक बर्दाश्त करें ||
    रहस्य को समझें ||
    खूबसूरत तरीका ||

    बधाई ||

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  6. बारिश और क्रांति दुनो से ...
    टाइम खोटी .... पैसा खोटी....

    सटीक पकडा, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  7. ईद की सिवैन्याँ, तीज का प्रसाद |
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    कुंडली की
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    महा नाट्य-शाला भरे, दीवारों को तोड़ |
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  10. बहुत ख़ूबसूरत और सटीक प्रस्तुति..बहुत रोचक प्रस्तुतीकरण..

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  11. और उ जो जूस की दूकान पर खड़े है.... उ बारिश में नहीं भीगना चाहते ...पर क्रांति की बातें करते हैं ..
    sateek vayangya ....badhyee..sawikariye

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  12. व्यंग्य की तलवार की धार जबरदस्त है| इससे बचे ना कोय......

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  13. सही कहा...

    बारिश और क्रांति दुनो से ...
    टाइम खोटी .... पैसा खोटी....

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  14. सौभाग्य की आपके ब्लॉग पर आना हुआ।

    बारिश में नहीं भीगना चाहते ...
    पर क्रांति की बातें करते हैं ...
    विद्वतापूर्ण तरीके से....


    कितनी आसानी से आपने वो बात कह दी जिसे लिखने के लिए उपन्यास लिखा जाता है। छोटी सी बात में बड़ी चीजें खोज निकाली जो आपके संवेदना का परिचायक है।

    सादर

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  15. आपका अंदाज़ पसन्द आया! बधाई!

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  16. बढ़िया चित्र और उसपर व्यावहारिक कविता ! अंदाज़े बयां पसंद आया !

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